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माही वेलफेयर सोसाइटी

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अंबालिका इंस्टिट्यूट में आयोजित 8वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी : डॉ. राजेश्वर सिंह ने AI की शक्ति और भविष्य की संभावनाओं पर डाला प्रकाश






भारत को AI क्रांति में नेतृत्व करना चाहिए: डॉ. राजेश्वर सिंह ने इंजीनियरों के लिए डिजिटल साक्षरता का आह्वान किया*हर साल 1.5 मिलियन इंजीनियर स्नातक होते हैं, डॉ. राजेश्वर सिंह ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए AI को अपनाने पर दिया जोर विष्यवक्ताओं का अनुमान: 2045 तक मशीनें मानव बुद्धिमत्ता से आगे निकल जाएंगी – डॉ. राजेश्वर सिंह



डॉ. सिंह ने डिजिटल साक्षरता को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि AI को समझना अब एक विकल्प नहीं, बल्कि सफलता की कुंजी है। उन्होंने चेताया कि यदि भारत डिजिटल डिवाइड (डिजिटल अंतराल) को दूर नहीं करता, तो देश वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकता है।


उन्होंने AI से जुड़े नैतिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में AI का उपयोग किस हद तक होना चाहिए, इस पर गंभीर विचार होना चाहिए। उन्होंने युद्ध और सैन्य अभियानों में AI की भूमिका को लेकर चिंता जताई और कहा कि मशीनें कब और कैसे निर्णय लेंगी, यह एक संवेदनशील विषय है, इसलिए AI के उपयोग की सीमाएँ तय करना आवश्यक है।


डॉ. सिंह ने भारत में साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि 2018 में जहां साइबर अपराध के 26,000 मामले सामने आए थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 26 लाख तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि देश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कुशल इंजीनियरों और विशेषज्ञों की आवश्यकता है, ताकि डिजिटल खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।


डॉ. सिंह ने उपस्थित छात्रों से आग्रह किया कि वे AI अनुसंधान, कौशल विकास और नवाचार में सक्रिय रूप से भाग लें, ताकि डिजिटल इंडिया मिशन और AI स्टार्टअप्स के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई ₹10,371 करोड़ की निधि का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।


इस दौरान विधायक ने सम्बंधित विषय पर आर्टिकल प्रस्तुत  करने वाले विजेताओं को ट्राफी भी प्रदान की। कार्यक्रम में संस्थान के चेयरमैन अंबिका मिश्रा, निदेशक डॉ. अशुतोष द्विवेदी, अतिरिक्त निदेशक डॉ. श्वेता मिश्रा, पूर्व IRS अधिकारी रामेश्वर सिंह, KSG (सेंटर फॉर क्वालिटी माइंड्स, बेंगलुरु) के निदेशक प्रो. के. एस. गुप्ता, अकादमिक विशेषज्ञ कर्नल डॉ. समीर मिश्रा, ब्रिगेडियर आर. के. सिंह, और लखनऊ विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. पुनीत मिश्रा मौजूद रहे  थे।

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