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माही वेलफेयर सोसाइटी

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लखनऊ 10 मार्च को संसद में इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 पेश किए जाने की योजना से बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों में भारी आक्रोश : 27 लाख बिजली कर्मचारी व इंजीनियर कार्य बहिष्कार कर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे

10 मार्च को संसद में इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 पेश किए जाने की योजना से बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों में भारी आक्रोश : 27 लाख बिजली कर्मचारी व इंजीनियर कार्य बहिष्कार कर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे

नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स एनसीसीओईईई) के आह्वान पर देशभर के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 10 मार्च 2026 को प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को संसद में पेश किए जाने के विरोध में कार्य बहिष्कार कर सड़कों पर उतरकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

यह निर्णय आज नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ऑनलाइन बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के  चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने की।


बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार एनसीसीओईईई ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि किसान विरोधी, उपभोक्ता विरोधी और कर्मचारी विरोधी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को संसद में पेश न किया जाए। यदि सरकार इस बिल को संसद में पेश करती है तो देशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसका जोरदार विरोध करेंगे।


शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि इससे पहले विद्युत मंत्रालय ने इस बिल पर हितधारकों से सुझाव मांगे थे। देशभर के पावर सेक्टर से जुड़े सभी फेडरेशनों, ट्रेड यूनियनों और संगठनों ने सर्वसम्मति से कहा था कि यह बिल जनविरोधी है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।


लेकिन हितधारकों की टिप्पणियों को न तो सार्वजनिक किया गया और न ही परामर्श बैठकों की कार्यवाही (मिनट्स) जारी की गई।


इसके विपरीत, 30 जनवरी 2026 को विद्युत मंत्रालय ने एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया जिसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन को भी शामिल किया गया, जो खुले तौर पर बिजली क्षेत्र के निजीकरण का समर्थन करता रहा है।


शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि जिस संगठन ने पहले ही इस बिल का समर्थन कर दिया है, उसे ही कानून को अंतिम रूप देने वाले वर्किंग ग्रुप में शामिल करना पूरी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और असंवैधानिक बनाता है।


उन्होंने कहा कि देशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर विद्युत मंत्रालय के इस एकतरफा कदम के खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं और इसका पुरजोर विरोध करने के लिए तैयार हैं।


एनसीसीओईईई ने यह भी निर्णय लिया है कि 09 मार्च को दिल्ली में एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के सांसदों को आमंत्रित कर उन्हें इस बिल के किसानों, गरीब उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी। सांसदों से आग्रह किया जाएगा कि यदि यह बिल संसद में पेश किया जाता है तो वे इसका विरोध करें और किसी भी स्थिति में इसे पारित न होने दें।


बैठक में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे,महासचिव पी. रत्नाकर राव, ऑल इंडिया पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष आर.के. त्रिवेदी, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज के महासचिव मोहन शर्मा, कृष्णा, इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव एवं नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के संयोजक सुदीप दत्ता, उपाध्यक्ष सुभाष लाम्बा तथा ऑल इंडिया पावरमेंस फेडरेशन के आर.के. पाराशर सहित अन्य प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे।


सभी फेडरेशनों  ने अपने-अपने सदस्यों को अलर्ट जारी करते हुए निर्देश दिया है कि 10 मार्च को इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में कार्य बहिष्कार कर सड़कों पर उतरने की तैयारी करे

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