लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय गणित सम्मेलन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने वैश्विक युवा मस्तिष्कों को किया प्रेरित
CMS IYMC 2025 में डॉ. राजेश्वर सिंह ने युवाओं से भारत के डिजिटल और सतत भविष्य का नेतृत्व करने का किया आह्वान
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता की सेवक बने, शासक नहीं” - युवा गणितज्ञों के नाम डॉ. राजेश्वर सिंह का प्रेरक संदेश
विज्ञान, जागरूकता और मूल्यों के माध्यम से युवा कर सकते हैं पृथ्वी की रक्षा - CMS IYMC 2025 में बोले डॉ. राजेश्वर सिंहयुवा अपनी डिजिटल क्षमताओं को निखारें - भविष्य उन्हीं का होगा,” अंतर्राष्ट्रीय गणित सम्मेलन में बोले डॉ. राजेश्वर सिंह
भारत के युवा नवाचार और नेतृत्व की सीमाएँ कर रहे हैं पुनर्परिभाषित - डॉ. राजेश्वर सिंह*
लखनऊ: सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर एक्सटेंशन में आयोजित 10वां अंतर्राष्ट्रीय युवा गणितज्ञ सम्मेलन (IYMC) 2025 में सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने प्रेरक संबोधन से दस देशों से आए प्रतिभागी छात्रों को प्रोत्साहित किया। यह सम्मेलन गणित की उस वैश्विक भाषा का उत्सव था जो पूरे विश्व को एक सूत्र में बाँधती है।
CMS की विरासत की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि सिटी मॉन्टेसरी स्कूल न केवल भारत के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में से एक है बल्कि विश्व के श्रेष्ठतम शैक्षणिक संस्थानों में गिना जाता है। “जो सपना डॉ. जगदीश गांधी जी ने 1959 में देखा था, वह आज एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है - 63,000 छात्र, 21 कैम्पस और ‘विश्व शांति के लिए शिक्षा’ की अनूठी परंपरा, CMS इसका जीवंत उदाहरण है,” डॉ. सिंह ने कहा, साथ ही संस्थान की प्रबंधक प्रो. गीता गांधी किंगडन जी द्वारा इस विरासत को आगे बढ़ाने के कार्य की भी सराहना की।
युवा गणितज्ञों को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि गणित मात्र एक विषय नहीं, बल्कि हर आधुनिक तकनीक की नींव है — यह वह सार्वभौमिक भाषा है जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड को जोड़ती है। “बुद्धिमान मशीनों के इस युग में गणित हमें हर चुनौती से पार पाने की शक्ति देता है। वर्ष 2045 तक साइबरनेटिक इंटेलिजेंस संयुक्त मानव बुद्धि से भी आगे निकल जाएगी - ऐसे में युवाओं को अपने डिजिटल कौशल, वैज्ञानिक समझ और नैतिक विवेक को उन्नत करना होगा ताकि वे इस परिवर्तन का नेतृत्व कर सकें।” उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) हमेशा मानवता की सेवक बने, शासक नहीं। युवाओं को समाज के कल्याण हेतु जिम्मेदारी के साथ नवाचार करने की प्रेरणा दी।
डॉ. सिंह ने सतत विकास (Sustainable Development) के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जहाँ पूर्व पीढ़ियों ने स्वतंत्रता के बाद अस्तित्व की चुनौती का सामना किया, वहीं वर्तमान पीढ़ी सततता की चुनौती से जूझ रही है।
पर्यावरणीय आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “हर वर्ष लगभग 60 लाख लोग वायु प्रदूषण के कारण अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से लगभग 25 लाख मौतें भारत में होती हैं। हम अपने बच्चों को ऐसा असुरक्षित संसार नहीं दे सकते।” उन्होंने ‘अर्थ ओवरशूट डे (Earth Overshoot Day)’ की अवधारणा समझाते हुए कहा कि आज मानव उपभोग की गति प्रकृति की पुनरुत्पादन क्षमता से कहीं अधिक तेज़ हो चुकी है, “1971 में यह दिन 25 दिसम्बर को आता था, जबकि अब यह 1 अगस्त तक सिमट गया है। यह दिखाता है कि हम संसाधनों का अत्यधिक दोहन कर रहे हैं।”
उन्होंने युवाओं से सौर ऊर्जा, हरित ऊर्जा और विद्युत वाहनों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया, जिन्हें उन्होंने स्वच्छ और सुरक्षित विश्व के वास्तविक स्तंभ बताया। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक प्रेरक उदाहरण का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि तीन युवा उद्यमियों में से दो भारतीय हैं, जिन्होंने केवल 22 वर्ष की आयु में सैन फ्रांसिस्को में एक एआई आधारित भर्ती कंपनी (AI-based recruitment company) की स्थापना की है, जिसने 350 मिलियन डॉलर का राजस्व अर्जित कर लिया है और जिसकी कंपनी का मूल्यांकन 10 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है। “इन युवाओं ने मार्क जुकरबर्ग का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने यह उपलब्धि 23 वर्ष की आयु में हासिल की थी। यह दिखाता है कि भारत के युवा आज तकनीक, बुद्धिमत्ता और वैश्विक नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं,” डॉ. सिंह ने कहा।
अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “भारत के युवा विचारों, नवाचार और ऊर्जा से भरे हुए हैं। हमारी 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है - यह हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यदि इस ऊर्जा और नवाचार को सही दिशा दी गई, तो भारत केवल उभरेगा नहीं, बल्कि विश्व का नेतृत्व करेगा।” कार्यक्रम में संस्थापक निदेशिका डॉ. (श्रीमती) भारती गांधी,प्रबंधक प्रो. गीता गांधी किंगडन, प्रो. महेश काकड़े, विधायक श्री राजेश गौतम, सोमा चंद्रा, तथा प्रशांत कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।




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