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माही वेलफेयर सोसाइटी

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लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि 26 फरवरी को संघर्ष समिति की प्रांतीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में बिजली कर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने तथा आंदोलन में सक्रिय कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं के विरुद्ध की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों पर विस्तृत चर्चा कर आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश कर्मियों के आवासों पर स्मार्ट मीटर लगाने एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में 26 फरवरी को प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में आंदोलन पर होगा निर्णय : भय का वातावरण बना कर निजीकरण की प्रक्रिया बढ़ाने हेतु  किया जा रहा है निलंबन और ट्रांसफर

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि 26 फरवरी को संघर्ष समिति की प्रांतीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में बिजली कर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने तथा आंदोलन में सक्रिय कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं के विरुद्ध की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों पर विस्तृत चर्चा कर आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि बिजली कर्मियों के आवासों पर स्मार्ट मीटर लगाने के पीछे राजधानी लखनऊ सहित कुछ चुनिंदा शहरों को फ्रेंचाइजी मॉडल पर देने की योजना है और निजी क्षेत्र के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके।


संघर्ष समिति ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी रिफॉर्म एक्ट 1999, ट्रांसफर स्कीम 2000, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 तथा पूर्व में हुए सभी समझौतों का खुला उल्लंघन करते हुए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। जिन शहरों को फ्रेंचाइजी मॉडल पर देने की तैयारी है, वहां पहले ही वर्टिकल व्यवस्था लागू कर हजारों संविदा कर्मियों को हटाया जा चुका है तथा नियमित कर्मचारियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किया गया है।


संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में भय का वातावरण बनाने के लिए मनमाने ढंग से कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और इंजीनियरों का निलंबन किया जा रहा है और उन्हें दूर दराज के स्थान पर ट्रांसफर किया जा रहा है। राजधानी लखनऊ में लेसा में कल बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों के निलंबन और ट्रांसफर का उद्देश्य केवल भय का वातावरण बनाना है।


संघर्ष समिति के अनुसार, पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में विगत 455 दिनों से चल रहे आंदोलन के दौरान लगभग 25,000 संविदा कर्मियों को सेवा से हटाया जा चुका है तथा आंदोलन में सक्रिय कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं पर दमनात्मक कार्यवाहियां की गई हैं।


संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि 26 फरवरी की बैठक में इन सभी मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक विचार-विमर्श कर आंदोलन की आगामी रणनीति का सम्यक एवं ठोस निर्णय लिया जाएगा।


संघर्ष समिति के आह्वान पर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 455 दिन पूर्ण होने पर प्रदेश के सभी जनपदों एवं परियोजनाओं पर आज भी व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

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