विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश
त्योहारों से पूर्व लेसा में 56 संविदा कर्मियों की छंटनी से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश : ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मियों के लिये मानदेय बढ़ाने हेतु मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने लेसा में दिनांक 18 मार्च को “वर्टिकल व्यवस्था” के नाम पर 56 संविदा/आउटसोर्स कर्मियों को कार्य से हटाए जाने की घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे पूरी तरह अन्यायपूर्ण एवं कर्मचारी विरोधी कदम बताया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इससे पूर्व भी लगभग 200 संविदा कर्मियों की लेसा में छंटनी की जा चुकी है, जिससे बिजली कर्मियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में आगामी त्योहारों के मद्देनजर जहां एक ओर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार की छंटनी से बिजली कर्मियों का मनोबल गिर रहा है और उनमें भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया है। ऐसी स्थिति में विद्युत व्यवस्था प्रभावित होने की पूरी संभावना है, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा 01 अप्रैल से आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि का जो सराहनीय निर्णय लिया गया है, उसका लाभ अब तक पावर कॉर्पोरेशन, डिस्कॉम एवं अन्य ऊर्जा निगमों के संविदा/आउटसोर्स कर्मियों को मिलना संदिग्ध बना हुआ है। यह स्थिति कर्मचारियों के साथ अन्यायपूर्ण भेदभाव को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन की और से शासन को 19 दिसम्बर को पत्र लिख कर मांग की गई है कि पावर कॉरपोरेशन के संविदा कर्मियों को आउटसोर्स निगम से अलग रखा जाय। इसी रवैये के तहत पावर कार्पोरेशन प्रबंधन संविदा कर्मियों का मनमाने ढंग से उत्पीड़न कर रहा है।
संघर्ष समिति ने आज माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र भेजकर उनसे तत्काल हस्तक्षेप करते हुए निम्न मांगें पूर्ण करने का आग्रह किया है—
पावर कॉर्पोरेशन, समस्त डिस्कॉम एवं ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा/आउटसोर्स कर्मियों पर भी 01 अप्रैल से मानदेय वृद्धि का आदेश लागू किया जाए।
“वर्टिकल व्यवस्था” के नाम पर की जा रही छंटनी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
त्योहारों के ठीक पहले 18 मार्च को हटाए गए 56 कर्मियों सहित सभी निष्कासित संविदा कर्मचारियों को शीघ्र बहाल किया जाए।
आउटसोर्स कर्मियों के लिए सेवा स्थायित्व एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय को तत्काल नहीं रोका गया, तो बिजली कर्मियों का आक्रोश और अधिक बढ़ेगा, जिससे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था प्रभावित हो सकती है जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 478 दिन पूर्ण होने पर आज भी जनपदों में बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन पूर्ववत जारी रहा


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