राष्ट्र स्तरीय पसमांदा मुस्लिम चिंतन कार्यशाला का आयोजन 'वर्तमान राजनीतिक परिवेश में पसमांदा समाज के समहा चुनौतियाँ, संभावित समाधान एवं भविष्य की रणनीति
लखनऊ। यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज द्वारा आज राष्ट्र स्तरीय पसमांदा मुस्लिम चिंतन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देशभर से पसमांदा समाज के सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद्, समाजसेवी संस्थाएं, युवा नेता, महिला प्रतिनिधि,
उलेमा, अधिवक्ता एवं पत्रकार विभिन्न स्तर के पदाधिकारी वा आमंत्रित प्रबुद्धजन शामिल हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वर्तमान राजनीतिक परिवेश में पसमांदा मुस्लिम समाज (भारतीय मुस्लिम आबादी का लगभग 85 प्रतिशत) के समक्ष विद्यमान चुनौतियों का आकलन करना, व्यावहारिक समाधान ढूंढना तथा वर्ष 2026-2027 के लिए ठोस, चरणबद्ध एवं परिणामजनक रणनीति तैयार करना रहा। कार्यशाला के प्रमुख
प्रस्ताव एवं निर्णय "संगठनात्मक सुधार- संगठन की संरचना का SWOT स्वाट विश्लेषण एवं चार जोनों में विभाजन। जिला, तहसील, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत शहर वार्ड स्तर तक प्रभावी उत्तरदायी संगठन का गठन। अनुशासन समिति, आचार संहिता एवं डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली लागू। युवा, महिला, छात्र
एवं विभिन्न विंगों का गठन। सदस्यता अभियान प्रत्येक जिले में प्रतिमाह न्यूनतम 500 नए सक्रिय रु 10/ सदस्य जोड़ने का लक्ष्य। शिक्षा, रोजगार एवं सामाजिक सुधार- 'स्कूल चलो अभियान के तहत RTE का लाभ सुनिश्चित करना, तथा अल्पसंख्यक संस्थाओं में 25 प्रतिशत गरीब ओबीसी एसटी अल्पसंख्यक बच्चों का प्रवेश आरक्षण हेतु आरटीई में संशोधन मदरसों में दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा के साथ पैगंबर के अराफात के आखिरी खुतबे व कुरान के सर्व धर्म समभाव से संबंधित को अंश आधारित पाट को बढ़ावा देना।
दहेज, जातीय भेदभाव जैसी कुरीतियों के विरुद्ध अभियान। कौशल विकास, कोचिंग एवं स्वरोजगार कार्य। राजनीतिक भागीदारी पंचायत से लेकर लोकसमा तक पर्याप्त प्रतिनिधित्व का ओबीसी आरक्षण के अनुरूप पसमांदा मुस्लिम लीडरशिप विकास लक्ष्य। आगामी चुनावों में पसमांदा उम्मीदवारों को संसदीय विधाविका हेतु टिकट देने की राजनीतिक दलों से अपने सक्षम उम्मीदवारों की भागीदारी टिकट अपील। विशेष
रूप से भाजपा से मुरादाबाद देहात, टांडा, मुबारकपुर, कैराना, नगीना, इसौली, बेहट, रामपुर स्वार, बहराइच, पीलीभीत सदर आदि सीटों पर पसमांदा प्रतिनिधियों को टिकट देने की मांग। केंद्र सरकार एवं राजनेतिक दलों से प्रमुख मांगें अनुच्छेद 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटाने तथा जस्टिस कंजी बालाकृष्णन आयोग की रिपोर्ट की घोषणा पसमांदा समाज की अलग सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना। OBC/MBC में उप-
श्रेणीकरण एवं पशमांदा आयोग का गठन। वक्फ बोर्ड, मदरसा बोर्ड एवं अल्पसंख्यक संस्थानों में पसमांदा प्रतिनिधित्व । - हेट स्पीच, लिंचिंग पर प्रभावी रोक। महाज की प्रतिबद्धता आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज एक राष्ट्रवादी, गैर-राजनीतिक एवं सामाजिक संनउन है जो पसमांदा समाज को मुख्यधारा में लाने, सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार एवं राजनीतिक
हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्यरत है। संगठन शिया-सुन्नी भारत के गरालकी विभाजनों से ऊपर उठकर केवल 85 प्रतिशत पसमांदा मुस्लिम सामाजिक शिक्षा मुद्दों पर एकजुटता पर जोर देता है तथा धार्मिक उन्माद एवं कट्टरता से दूरी बनाए रखने की अपील करता है। कार्यशाला में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि पसांदा समाज को अब मौन रहने का विकल्प नहीं है।
12 पसमांदा बाहुल्य राज्यों में पसमांदा बेदारी की सफलता के बाद समाज को पसमांदा चिंतन पर सक्रियता के साथ, जागरूक एवं रणनीतिक रूप से आगे आना होगा। "समापन सत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज हनीफ एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी "मुहम्मद युनुस ने कहा झ 'आज की यह कार्यशाला केवल चर्चा नहीं, बल्कि पसमांदा समाज के उत्थान की दिशा में एक ठोस कदम है। हम संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय एवं राष्ट्रिय एकता को नजबूत करते हुए समाज को सशक्त बनाएंगे। संगठन ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में बेहतर आयोजनों का संकल्प लिया।








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