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लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर की जा रही मनमानी कार्यवाहियों से पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है।

 विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश

वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर अयोध्या में 52 संविदा कर्मियों की छंटनी एवं मेरठ में अभियंताओं व जूनियर इंजीनियरों के निलंबन से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश : 02 अप्रैल को प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर की जा रही मनमानी कार्यवाहियों से पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है।


संघर्ष समिति ने कहा कि राजधानी लखनऊ सहित अयोध्या, मेरठ और अन्य शहरों में लागू की गई वर्टिकल व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है, जिससे बिजली व्यवस्था पटरी से उतर गई है। अपनी विफलता स्वीकार करने के बजाय प्रबंधन अब इसका ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ते हुए दमनात्मक कार्यवाहियां कर रहा है।


संघर्ष समिति ने बताया कि अयोध्या में एक ही आदेश के तहत 52 अत्यंत अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया, जिससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।


वहीं मेरठ में ट्रांसफार्मर डैमेज के नाम पर अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता एवं जूनियर इंजीनियरों को मनमाने ढंग से निलंबित किया गया है। संघर्ष समिति ने पहले ही ट्रांसफार्मर क्षति की भरपाई अभियंताओं से कराने के आदेश का कड़ा विरोध किया था।


संघर्ष समिति ने आशंका व्यक्त की कि आगामी गर्मियों में बिजली आपूर्ति में संभावित व्यवधानों के लिए कर्मचारियों एवं अभियंताओं को दोषी ठहराने की मंशा से ही यह उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही है।


संघर्ष समिति ने प्रदेश के समस्त बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों से आह्वान किया है कि वे 02 अप्रैल को भोजनावकाश के दौरान अथवा कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन करें।


संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल बंद नहीं की गईं और संघर्ष समिति के साथ सार्थक संवाद शुरू नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में और व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।


गौरतलब है कि निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन आज 490वें दिन में प्रवेश कर गया है और प्रदेशभर के बिजली घरों में लगातार विरोध जारी है।

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