लखनऊ में ‘दुःखा तो मेरा साथी है’ आत्मकथा का भव्य लोकार्पण, साहित्य प्रेमियों की उमड़ी भीड़
लखनऊ। राजधानी में साहित्यिक माहौल उस समय जीवंत हो उठा, जब प्रतिष्ठित संस्था में लेखक की चर्चित आत्मकथा ‘दुःखा तो मेरा साथी है’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया
इस अवसर पर लेखक ने न केवल अपनी पुस्तक का विमोचन किया, बल्कि एक विस्तृत परिचर्चा के माध्यम से जीवन के संघर्ष, अनुभवों और आत्मबल से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह आत्मकथा उनके जीवन के कठिन दौर, संघर्षों और उनसे मिली सीख का सजीव दस्तावेज है, जो पाठकों को प्रेरित करने का कार्य करेगी
कार्यक्रम का आयोजन के तत्वावधान में किया गया, जिसमें साहित्य प्रेमियों, बुद्धिजीवियों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
इस सफल आयोजन के संयोजक (निदेशक, एलिगेंट इंफ्रा डेवलपर्स) ने सभी अतिथियों और सहभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में साहित्य और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक और यथार्थपरक बताया। यह लोकार्पण समारोह लखनऊ के साहित्यिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।



0 Comments