जिला सहकारी बैंक कर्मियों का 22 मई को लखनऊ में बड़ा धरना, 200 से अधिक कर्मचारी होंगे शामिल
एवं से जुड़े जिला सहकारी बैंक कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त एवं निबंधक, सहकारिता उत्तर प्रदेश को ज्ञापन सौंपकर कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
संगठन के महामंत्री ने बताया कि प्रदेश के जिला सहकारी बैंकों में मानव संसाधन की भारी कमी है और 16 जिला बैंकों में पिछले 30 वर्षों से वेतन पुनरीक्षण नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वेतन पुनरीक्षण में अनुचित प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं तथा आगामी वेतन पुनरीक्षण को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने जिला बैंक प्रबंधन पर कर्मचारियों की वित्तीय सेवा शर्तों को रोकने, अधिकारियों की स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता न होने, पंजीकृत संगठनों से नियमित वार्ता न करने तथा अवकाश के दिनों में बैंक एवं गैर-बैंकिंग कार्यों का दबाव बनाने का आरोप लगाया।
कर्मचारियों ने वर्ष 2012 से 2017 के बीच नियुक्त बैंक कर्मियों के लंबित देयों एवं सेवा शर्तों के मामलों का समाधान हाल ही में आए के निर्णय के आधार पर करने की मांग भी उठाई। साथ ही विशेष परिस्थितियों में इच्छुक कर्मचारियों के एक जिला बैंक से दूसरे जिला बैंक में आमेलन एवं प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई।
महामंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसी क्रम में 22 मई 2026 को प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता कार्यालय, लखनऊ पर विशाल धरना आयोजित किया जाएगा। धरने में करीब 200 सहकारी बैंक कर्मियों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी भी भाग लेंगे।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्य उपाध्यक्ष एवं ने किया। प्रतिनिधिमंडल में लखनऊ, बाराबंकी, एटा और बरेली के राज्य पदाधिकारी भी शामिल रहे।

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