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लखनऊ, 22 जुलाई, 2026। भूजल सप्ताह (16–22 जुलाई, 2026) के समापन अवसर पर राज्य संग्रहालय, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) द्वारा आज दिनांक 22 जुलाई, 2026 को "भूजल एवं पर्यावरण संरक्षण" विषय पर आधारित कैनवास पेंटिंग प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा पीढ़ी में भूजल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना था।

 राज्य संग्रहालय, लखनऊ में भूजल एवं पर्यावरण संरक्षण विषयक कैनवास पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोज

लखनऊ, 22 जुलाई, 2026।

भूजल सप्ताह (16–22 जुलाई, 2026) के समापन अवसर पर राज्य संग्रहालय, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) द्वारा आज दिनांक 22 जुलाई, 2026 को "भूजल एवं पर्यावरण संरक्षण" विषय पर आधारित कैनवास पेंटिंग प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा पीढ़ी में भूजल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना था।

प्रतियोगिता में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, टेक्नो ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, उत्तर प्रदेश, राज्य ललित कला अकादमी, अमीरुद्दौला इस्लामिया डिग्री कॉलेज तथा गोयल इंस्टिट्यूट के कुल 51 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों ने अपने चित्रों के माध्यम से भूजल संरक्षण, जल संकट, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों को अत्यंत ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

निर्णायक मंडल द्वारा उत्कृष्ट कलात्मक अभिव्यक्ति एवं विषय की प्रभावी प्रस्तुति के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार सुश्री रिया जायसवाल (गोयल इंस्टिट्यूट), द्वितीय पुरस्कार श्री सर्वजीत प्रजापति (टेक्नो ग्रुप ऑफ कॉलेजेज) तथा तृतीय पुरस्कार श्री प्रभात (डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय) को प्रदान किया गया।

इसके अतिरिक्त प्रोत्साहन पुरस्कार अक्षय प्रताप सिंह, रवि कश्यप, अभिनव, विपिन, प्रकाशनी, सृष्टि शुक्ला तथा इशिका यादव को प्रदान किए गए।


विजेता प्रतिभागियों को सुश्री अल शाज़ फातमी फात्मी फ़ात्मी, सहायक निदेशक, राज्य संग्रहालय, लखनऊ, डॉ. तबस्सुम खान, असिस्टेंट प्रोफेसर, इस्लामिया डिग्री कॉलेज, श्री विकास विश्वकर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, राज्य ललित कला अकादमी तथा श्री अलख कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, राज्य ललित कला अकादमी द्वारा पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।


इस अवसर पर सुश्री अल शाज फातमी ने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं भूजल संरक्षण में इसके महत्व पर  प्रकाश डालते हुए बताया गया कि भारत में सदियों से भूजल संरक्षण और जल प्रबंधन के लिए कई स्वदेशी और जल प्रबंधन प्रणालियां मौजूद रहीं हैं। भूजल संरक्षण आज की सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय आवश्यकता है तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग एवं संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने में कला एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकती है। उन्होंने युवाओं से जल एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का आह्वान किया।

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