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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन पर दमनकारी रवैया अपनाने, संवादहीनता बनाए रखने तथा शासन एवं मुख्य सचिव के स्पष्ट

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश

पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन के दमनकारी रवैये से ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण : मुख्य सचिव के स्पष्ट  की भी अनदेखी, तीन वर्षों से संघर्ष समिति से कोई वार्ता नहीं*


विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन पर दमनकारी रवैया अपनाने, संवादहीनता बनाए रखने तथा शासन एवं मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देशों की लगातार अवहेलना करने का गंभीर आरोप लगाया है। संघर्ष समिति का कहना है कि प्रबंधन की हठधर्मिता और कर्मचारी विरोधी नीतियों के कारण ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण लगातार गहराता जा रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव विद्युत व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।


संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा समय-समय पर सभी विभागों को निर्देश दिए जाते रहे हैं कि मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनों एवं सेवा संघों के साथ नियमित वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। किंतु अत्यंत आश्चर्य और दुर्भाग्य का विषय है कि पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने पिछले तीन वर्षों में एक बार भी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र से औपचारिक वार्ता करना आवश्यक नहीं समझा। उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ऊर्जा निगमों के 16 प्रमुख श्रमिक एवं सेवा संगठनों का संयुक्त मंच है, जो  बिजली कर्मियों की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करता है।


संघर्ष समिति ने कहा कि विगत वर्षों में ऊर्जा मंत्री के साथ संघर्ष समिति के कई महत्वपूर्ण लिखित समझौते हुए, परंतु पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने उन्हें पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया। जब इन समझौतों को लागू कराने के लिए मार्च 2023 में संघर्ष समिति ने सांकेतिक आंदोलन किया, तो समस्याओं का समाधान करने के बजाय बिजली कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई तथा उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई।


संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि आंदोलन के दो दिन बाद 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा के साथ हुई वार्ता में स्पष्ट सहमति बनी थी। संयुक्त प्रेस वार्ता में ऊर्जा मंत्री ने तत्कालीन अध्यक्ष, पॉवर कॉरपोरेशन को निर्देश दिया था कि आंदोलन के कारण बिजली कर्मियों पर की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयाँ वापस ली जाएँ, हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल कार्य पर बहाल किया जाए तथा आंदोलन से संबंधित सभी एफआईआर एवं मुकदमे वापस लिए जाएँ। दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसके विपरीत कई कर्मचारियों को वृहत दंड दिए गए तथा हटाए गए संविदा कर्मियों को भी अब तक कार्य पर नहीं लिया गया।


संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि सामान्य धरना-प्रदर्शनों तक को आधार बनाकर कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाइयाँ की जा रही हैं। दूसरी ओर निजीकरण और डाउनसाइजिंग की नीति के तहत लगातार संविदा कर्मियों की सेवाएँ समाप्त की जा रही हैं। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है तथा विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।


संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर प्रबंधन मुख्य सचिव के नियमित संवाद संबंधी निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शासन को यह रिपोर्ट भेजी जाती है कि कर्मचारियों से निरंतर वार्ता हो रही है और उनकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने इसे वास्तविक स्थिति से पूर्णतः विपरीत एवं भ्रामक बताया।


संघर्ष समिति ने मांग की है कि पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन अपनी टकरावपूर्ण नीति त्यागकर तत्काल विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ  वार्ता प्रारंभ करे, 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का  पालन करे, आंदोलन एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शनों के कारण बिजली कर्मियों पर की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयाँ और दर्ज मुकदमे वापस ले तथा हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में पुनः बहाल करे। संघर्ष समिति ने कहा कि यही औद्योगिक सौहार्द, कर्मचारियों का मनोबल तथा प्रदेश की निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने का एकमात्र रास्ता है।


शैलेन्द्र दुबे

संयोजक

94150 06225

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