विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की रेटिंग में सुधार के बाद पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग तेज : विरोध प्रदर्शन जारी*
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी ताजा रेटिंग में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार को आधार बनाते हुए इनके प्रस्तावित निजीकरण के निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संघर्ष समिति ने कहा कि जब दोनों निगमों की कार्यक्षमता लगातार बेहतर हो रही है, तो निजीकरण का कोई औचित्य शेष नहीं रह जाता।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत निगम के अंतर्गत प्रदेश के सबसे पिछड़े और गरीब 42 जनपद आते हैं। जहां पूर्वांचल में सबसे अधिक गरीबी है वही दक्षिणांचल में बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में बहुत विषमताएं हैं और कई स्थानों पर पीने का पानी भी जमीन की बहुत नीचे है। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसे में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए इसकी तुलना ग्रेटर नोएडा और अन्य शहरी और औद्योगिक क्षेत्र से नहीं की जा सकती।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय की नवीनतम रेटिंग में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का स्कोर 11.23 से बढ़कर 45.04 हो गया है, जबकि इसकी रेटिंग ‘C-’ से सुधरकर ‘B-’ हो गई है। वितरण हानियां घटकर 15.53% रह गई हैं, जो राष्ट्रीय मानक के लगभग बराबर है। वहीं, कलेक्शन एफिशिएंसी 95% दर्ज की गई है, जो निगम के वित्तीय अनुशासन और कार्यक्षमता को दर्शाती है।
इसी प्रकार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का स्कोर 18.76 से बढ़कर 29.38 हो गया है तथा इसकी रेटिंग ‘C-’ से सुधरकर ‘C’ हो गई है। इसकी वितरण हानियां भी घटकर 15.96% रह गई हैं, जो राष्ट्रीय मानक के बेहद करीब है।
समिति ने आगे बताया कि दक्षिणांचल में औसत राजस्व वसूली और औसत विद्युत विक्रय दर के बीच का अंतर घटकर मात्र 16 पैसे प्रति यूनिट रह गया है, जबकि पूर्वांचल में यह अंतर 59 पैसे प्रति यूनिट तक सीमित हो गया है। यह सुधार दर्शाता है कि निगमों की वित्तीय स्थिति में निरंतर मजबूती आ रही है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन अब तक गलत और बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत आंकड़ों के आधार पर घाटे का हवाला देता रहा है, जिसके चलते निजीकरण का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से ऊर्जा क्षेत्र में औद्योगिक शांति प्रभावित हुई है।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मियों का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है। संघर्ष समिति ने माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है।
संघर्ष समिति ने यह भी उल्लेख किया कि विगत 482 दिनों से आंदोलनरत रहने के बावजूद बिजली कर्मियों ने उपभोक्ता सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान पूर्वांचल क्षेत्र में बिजली कर्मियों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्य ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है।
संघर्ष समिति ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन से आग्रह किया कि वह अपनी जिद छोड़ते हुए सुधार के वास्तविक तथ्यों को स्वीकार करे और पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय को तत्काल निरस्त करने की घोषणा करे। संघर्ष समिति का मानना है कि ऐसा होने पर बिजली कर्मचारी पूरी ऊर्जा के साथ विद्युत व्यवस्था के और अधिक सुदृढ़ीकरण में जुट जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण के विरोध में पिछले 482 दिनों से चल रहे आंदोलन के क्रम में आज भी प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

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