विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश
ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं में ज्वाइंट वेंचर समाप्त कर राज्य विद्युत उत्पादन निगम को परियोजनाएँ सौंपने की मांग : 3 साल बाद भी कार्य शुरू न होना चिंताजनक : कॉस्ट ओवररन होने से सैकड़ों करोड़ रु लगत बढ़ेगी :उत्पादन निगम को परियोजना देने से 40–50 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती हो सकती है बिजली
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मा० योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि ओबरा डी और अनपरा ई ताप विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के स्थान पर प्रदेश के व्यापक हित में राज्य विद्युत उत्पादन निगम को तत्काल सौंपा जाए। संघर्ष समिति का कहना है कि ज्वाइंट वेंचर का एम ओ यू होने के तीन साल बाद भी परियोजना पर कोई ठोस कार्य शुरू Star हो पाया है, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। उल्लेखनीय है कि इन परियोजनाओं को एनटीपीसी के साथ जॉइंट वेंचर में बनाने का एम ओ यू फरवरी 2023 में ग्लोबल समिट के दौरान हुआ था।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि सामान्यतः इस प्रकार की ताप विद्युत परियोजनाएँ लगभग पांच साल में पूर्ण हो जाती हैं, लेकिन ज्वाइंट वेंचर को स्वीकृति मिलने के तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होना गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। इससे प्लांट एंड मशीनरी की लागत में कॉस्ट ओवररन होने की पूरी संभावना है, जिसके कारण परियोजना की कुल लागत सैकड़ों करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है। इसका दुष्परिणाम यह होगा कि ज्वाइंट वेंचर में बनने वाली परियोजना से बिजली उत्पादन की लागत काफी बढ़ जाएगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि इन परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के स्थान पर राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए तो पहले से मौजूद बुनियादी सुविधाओं और कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग होने से बिजली की उत्पादन लागत 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक कम हो सकती है।
संघर्ष समिति ने मध्य प्रदेश सरकार का उदाहरण देते हुए बताया कि अमरकंटक परियोजना को लेकर वहां की कैबिनेट ने 28 मार्च 2023 को ज्वाइंट वेंचर में परियोजना लगाने का निर्णय लिया था। लेकिन दो वर्ष तक कोई उल्लेखनीय प्रगति न होने के कारण मध्य प्रदेश सरकार ने ज्वाइंट वेंचर को निरस्त कर परियोजना को अपने राज्य के उत्पादन निगम को सौंपने का निर्णय ले लिया। संघर्ष समिति का कहना है कि उत्तर प्रदेश में भी अब बिल्कुल ऐसी ही परिस्थितियाँ बन चुकी हैं।
संघर्ष समिति ने बताया कि फरवरी 2023 में एनटीपीसी के साथ ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं को बनवाने का ज्वाइंट वेंचर का एम ओ यू हुआ था जिसके अंतर्गत 2×800 मेगावाट ओबरा डी तथा 2×800 मेगावाट अनपरा ई ताप विद्युत परियोजनाएँ एनटीपीसी के साथ ज्वाइंट वेंचर में स्थापित की जाएँगी। लेकिन 3 साल बीत जाने के बाद भी न तो निर्माण कार्य शुरू हो सका है और न ही परियोजना के लिए आवश्यक कोयला लिंकेज की व्यवस्था हो पाई है।
संघर्ष समिति के अनुसार अभी तक नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) से कोल पिटहेड लिंकेज प्राप्त नहीं हो पाया है और वर्तमान स्थिति में लगभग 500 से 700 किलोमीटर दूर से कोयला लाने की संभावना बन रही है। इससे कोयले की ढुलाई पर ही अत्यधिक व्यय होगा और बिजली की उत्पादन लागत अनावश्यक रूप से बढ़ जाएगी।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि एक ही परिसर में दो अलग-अलग स्वामित्व वाली परियोजनाएँ स्थापित होने से अनेक परिचालन संबंधी समस्याएँ तथा भविष्य में कानूनी विवाद उत्पन्न होने की आशंका है। विशेष रूप से कोयला परिवहन और ऐश डिस्पोजल सबसे बड़ी चुनौतियाँ बन सकती हैं। वर्तमान में परिसर में केवल एक ही रेलवे लाइन उपलब्ध है, जिससे उत्पादन निगम के पहले से संचालित पावर हाउस और ज्वाइंट वेंचर के प्रस्तावित पावर हाउस दोनों के लिए कोयले की आपूर्ति में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसी प्रकार कोयला जलने के बाद बनने वाली राख के निस्तारण के लिए एक ही ऐश पोंड होने से गंभीर परिचालन दिक्कतें पैदा होने की संभावना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के हित में ज्वाइंट वेंचर का प्रस्ताव निरस्त कर ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं को तत्काल राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाना चाहिए, ताकि परियोजना समयबद्ध रूप से पूरी हो सके और प्रदेश को सस्ती बिजली उपलब्ध हो सके।
इस बीच, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में जारी आंदोलन के 471वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के सभी जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा


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