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राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा आयोजित प्रो. वासुदेव शरण अग्रवाल स्मृति व्याख्यानमाला (26 जुलाई से 07 अगस्त, 2026) के अंतर्गत आज दिनांक 28 जुलाई, 2026 को “मंदिर वास्तुकला ” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया।

 राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा आयोजित प्रो. वासुदेव शरण अग्रवाल स्मृति व्याख्यानमाला (26 जुलाई से 07 अगस्त, 2026) के अंतर्गत आज दिनांक 28 जुलाई, 2026 को “मंदिर वास्तुकला ” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व के प्रतिष्ठित विद्वान प्रो. अमर सिंह (सेवानिवृत्त) ने अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रो. सिंह ने अपने व्याख्यान का आरंभ प्रो. वासुदेव शरण अग्रवाल से जुड़े संस्मरणों से किया।

अपने व्याख्यान में प्रो. अमर सिंह ने भारतीय मंदिर वास्तुकला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विकास-क्रम तथा इसकी विविध स्थापत्य परंपराओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय मंदिर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र ही नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय कला, शिल्प, विज्ञान, दर्शन तथा सांस्कृतिक चेतना के उत्कृष्ट प्रतीक भी हैं। उन्होंने मंदिर स्थापत्य शैलियों की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए विभिन्न कालखंडों में विकसित मंदिर निर्माण परंपराओं की जानकारी दी।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने मंदिरों की संरचना, गर्भगृह, मंडप, शिखर, अलंकरण तथा मूर्तिकला के विविध आयामों पर चर्चा की और बताया कि भारतीय मंदिर वास्तुकला में आध्यात्मिकता एवं कलात्मकता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने अनेक ऐतिहासिक मंदिरों के उदाहरणों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि को रेखांकित किया।

विद्वान वक्ता का स्वागत डॉ. विनय कुमार सिंह, निदेशक, राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा किया गया। उन्होंने प्रो. वासुदेव शरण अग्रवाल के भारतीय संस्कृति, इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में योगदान का स्मरण करते हुए व्याख्यानमाला के महत्व पर प्रकाश डाला

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मीनाक्षी खेमका, सहायक निदेशक, सज्जा कला द्वारा किया गया। उन्होंने वक्ता का परिचय प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम का सफल संचालन किया।

इस अवसर पर शोधार्थियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, संस्कृति एवं इतिहास के अध्येताओं तथा संग्रहालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 

कार्यक्रम के अंत में वक्ता के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई।

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