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लखनऊ, 26 जुलाई 2026। जनपद हमीरपुर के चर्चित आपराधिक प्रकरण के वादी प्रियांशु गुप्ता अपनी मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में धरने पर बैठ गए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और शासन-प्रशासन उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई करने में विफल

 ईको गार्डन में धरने पर बैठे हमीरपुर कांड के वादी, बोले– न्याय नहीं मिला तो जंतर-मंतर पर करेंगे आमरण अनशन

लखनऊ, 26 जुलाई 2026। जनपद हमीरपुर के चर्चित आपराधिक प्रकरण के वादी प्रियांशु गुप्ता अपनी मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में धरने पर बैठ गए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और शासन-प्रशासन उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई करने में विफल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू करेंगे।

प्रियांशु गुप्ता का आरोप है कि मु०अ०सं० 21/2026 की विवेचना निष्पक्ष तरीके से नहीं की गई। उनका दावा है कि लगभग ₹1.5 करोड़ मूल्य के स्वर्ण आभूषणों से जुड़े कथित धोखाधड़ी एवं अमानत में खयानत के मामले में स्थानीय पुलिस ने प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिया और जांच को प्रभावित किया।


धरने पर बैठे प्रियांशु गुप्ता ने बताया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को भेजे गए प्रार्थना पत्र में पूरे मामले की जांच EOW, CBCID अथवा CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है। उनका यह भी दावा है कि 5 जून 2026 को राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा उत्तर प्रदेश शासन को कार्रवाई के लिए निर्देश भेजे गए थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर उन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।


वादी का आरोप है कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई तथा उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि 11 जुलाई 2026 को उनके लखनऊ स्थित आवास पर पुलिस बल भेजकर उन्हें जबरन उठाने का प्रयास किया गया ताकि उनका प्रस्तावित अनशन रोका जा सके।


धरने के दौरान प्रियांशु गुप्ता ने कहा कि वे न्याय मिलने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने राज्यपाल से दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग दोहराई।


हालांकि, प्रियांशु गुप्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों अथवा अन्य पक्ष का आधिकारिक बयान अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई के बाद ही हो सकेगा।

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